पंजाब सूफी मंच ने हिंदी साहित्यकार राजेंद्र टॉकी को मोहसिने उर्दू उपाधि से किया सम्मानित 

दीपक जालंधरी की कहानी संग्रह जिंदगी आसपास का हुआ विमोचन शायरों ने अपने कलाम से लूटी वाहवाही ।
जालंधर ( कामिल खान ) :- पंजाब सूफी मंच का 16 वां  मासिक मुशायरा रंगो और नूर आज यहां देशभक्त यादगार हाल में संपन्न हुआ । जिसकी अध्यक्षता उस्ताद शायर हरबंस सिंह अक्स ने की । जबकि मुख्य अतिथि के तौर पर खन्ना से तशरीफ लाए राजेंद्र टॉकी व वरिष्ठ साहित्यकार दीपक जालंधरी रहे । लुधियाना खन्ना होशियारपुर नकोदर व शहर के नामवर शायरों ने अपना कलाम सुनाकर मुशायरे की गरिमा को बुलंद रखा व अपनी शायरी से खूब वाह वाही लूटी । इस अवसर पर हिंदी साहित्य के एक बड़े हस्ताक्षर डॉ राजेंद्र टॉकी( खन्ना) जिनकी साहित्य सरजना ने हिंदी उर्दू साहित्य को 10 पुस्तकें आलोचना,  6 काव्य संग्रह, 2 कथा संग्रह 7 संपादन 14 उर्दू से देवनागरी मैं लिप्यंतरण व संपादन एक उर्दू से देवनागरी में अनुवाद 21 संकलित रचनाएं 50 शोध पत्र तहरे भूमिका ले 50 से अधिक भिन्न विषयों पर लेवल 1 देने वाले रचनाकार अनुवादक अनुसंधान संपादक व उर्दू साहित्य व शायरी में रुचि रखने वाले साहित्यकार की सेवाओं का सम्मान करते हुए पंजाब सूफी मंच के अदब विभाग ने वर्ष सन् 2018 वे 19 के लिए अपना सम्मान मोहसीन ए उर्दू से सुशोभित किया इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष शाहिद हसन शाहिद ने एक पत्र पढ़ा व प्रोफेसर बलवेंद्र सिंह ने श्री टोकी के साहित्यिक कार्यों पर प्रकाश डाला मंच ने एक और भूमिका निभाते हुए हिंदी उर्दू साहित्य के एक बड़े स्तंभ दीपक जालंधरी की कहानी संग्रह जिंदगी आसपास का विमोचन किया स्वतंत्र लेखक के तौर पर देश विदेश के समाचार पत्रों में प्रकाशित कई हजार व्यंग्यात्मक कॉलम 5 फीचर फिल्में 24 टीवी नाटक 125 करोड़ भारतीयों में 125 जालंधरीयो की पहचान बनाने वाले दीपक जालंधरी की हिंदी साहित्य को समपिॅत यह 14 वी  पुस्तक है मुशायरे में उपस्थित लोगों में सर्वश्री राजेंद्र टॉकी, दीपक जालंधरी, मोहन सपरा,  गीता डोगरा , विनोद गोयल एडवोकेट, वरुण आनंद लुधियाना,  शाहिद अपरा , विशाल काफिर होशियारपुर,  कमल पुरी खन्ना , साहिल जालंधरी , कमल भास्कर,  दाऊद आलम, जलील,  साहिल, जालंधरी , बलविंद्र सिंह,  रमन शर्मा , बलवेंद्र अत्रि , मेश मोदगिल, इकबाल सिंह,रंधावा,  डॉक्टर सतीश चंद्र,  रागिट हमदम,  हरबंस सिंह अक्स,  शाहिद हसन, शाहिद, ने अपना कलाम सुना कर वाहवाही लूटी । संगत राम वफा ने मुशायरे का संचालन अपने खास अंदाज से करते हुए उसको ऊंचाइयों तक पहुंचाया ।
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