गागलहेड़ी ( श्रीकांत शर्मा नौशाद अली ) ।कुम्हारेडा स्थित सावित्री बाई फुले राजकीय पॉलिटेक्निक की छात्राओं ने सहारनपुर-देहरादून हाईवे जाम कर प्रधानाचार्या दिलजिन्दर कोर  के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने प्रधानाचार्या को तत्काल हटाने और अपनी मांगों को पूरी करने जिला प्रशासन से मांग की।  विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर पंहुचे उप जिलाधिकारी, क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी ने छात्राओं को समझा बुझाकर मामले को शांत कराकर जाम हाईवे को खुलवाया।
           सावित्री बाई फुले पॉलिटेक्नीक की छात्राओं ने शनिवार को दूसरी बार फिर पॉलिटेक्निक के प्रधानाचार्या दिलजिन्दर कोर के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हाईवे जाम कर दिया। गुस्साई छात्राओं ने जिला प्रशासन से प्रधानाचार्या को तत्काल हटाने की मांग करते हुए प्रशासन से लिखित में आदेशों की मांग की। छात्राओं ने कॉलेज में हो रही असुविधाओं की जल्द से जल्द पूर्ति कराने की मांग की। करीब आधा धंटे हाईवे जाम रहने की पश्चात मौके पर पंहुचे उपजिलाधिकारी अनिल कुमार, क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी समेत मयफोर्स थाना गागलहेड़ी पुलिस ने मौके पर पहुंच कर मामले को शांत कराया। उपजिला अधिकारी अनिल कुमार ने छात्राओं की समस्या सुनी और जल्द ही मांगे पूरी करने और मामले की जांच करने का आस्वाशन देकर मामला शांत कराया।
           छात्राओं ने प्रधानाचार्या के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानाचार्या के द्वारा हमे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। हमसे कॉलेज परिसर में साफ सफाई कराई जाती है। शौचालय और स्नानगृह के दरवाजे सही नही है जिस कारण हमें शौच जाते हुए भय लगता है। मैडम के कारण हम ढंग से पढ़ नही पाती हमारी परीक्षा भी नजदीक आ गयी परंतु तैयारी कुछ नही हुई, खाने में कीड़े आते है आदि
          प्रधानाचार्या दिलजिन्दर कोर ने पूरे मामले पर अपने आप को निर्दोष बताते हुए कहा की मुझे स्टाफ और छात्राओं ने सडयंत्र का शिकार बनाया है मुझे एक गुनाह की दो दो सजा मिली है। छात्राओं की सुरक्षा मेरी अहम जिम्मेदारी है उसके लिए कंही सख्ती और कभी प्रेम जरूरी होता है। पूरा मामला एक छात्रा को छात्रावास के एक कमरे से दूसरे कमरे में भेजने से शुरू हुआ जिसमें उस छात्रा की यह शिकायत आई की वह रात में अन्य छात्रों को पढ़ाई करने में परेशान कर रही थी और हॉस्टल में भूत होने की अफवाह फैला रही थी। अन्य छात्राओं में दहशत न बैठे इसलिए कार्रवाही करते हुए मैने उसे दूसरे होस्टल के कमरे में व्यवस्थित कर दिया। जिसकी शिकायत उसने अपने परिजनों को की, आक्रोशित होकर मुझे कॉलेज से निकलवाने की जिद पर अड़ गई। छात्राओं ने गुट बना लिया और हमारे स्टाफ के भी कुछ सदस्य छात्राओं को स्पॉट करने लगे। कभी खाने में कीड़े डालने की शिकायत की जाती तो कभी गंदगी की शिकायत की जाती। छात्रायें इसलिए नाराज थी क्योंकि मैं उन्हों पढ़ाने के लिए बोलती थी और एक अध्यापक के लिहाज से कभी कभी डाँट भी देती थी। जिम्मेदार होने के कारण मुझे कॉलेज में सख्ती बरतनी पड़ती थी।
                       उन्होंने बताया कि खाने की गुणवत्ता की जिम्मेदारी होस्टल प्रबंधन की होती है। यदि खाने में कीड़े आते है तो उसकी जिम्मेदारी खाना बनाने वाले या रसोई प्रबंधन की है मेरी नही। मुझे इसका जिम्मेदार ठहराया गया है। मैंने कई बार खाने की गुणवत्ता को बढ़ाने की कोशिश की परंतु गुटबाजी में मेरी एक न चली।
                 मैंने कभी किसी छात्रा को सफाई करने को मजबूर नही किया। सफाई केवल स्वछता पखवाड़े के अंतर्गत अगस्त सितंबर के आसपास की जाती है।जिसमे छात्राये कॉलेज का स्टाफ श्रमदान कर सफाई अभियान चलाते है। जिसमे किसी को सफाई करने के लिए बाध्य नही किया जाता।
            नवचयनित प्रधानाचार्या मेघा शर्मा ने बताया कि पूरे मामले से कॉलेज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आज का विरोध प्रदर्शन छात्राओं का बड़ा कदम था। खाने की गुणवत्ता को सुधारने के लिए सभी राशन सामग्री को सुखा दिया है। स्वछता के कार्य किये जा रहे है। रसोई प्रबंधन पर नजर रखने के लिए छात्राओं और स्टाफ की समिति बना दी गयी है जो खाने की गुणवत्ता पर नजर रखेंगे। स्वछता पखवाड़े में स्टाफ और छात्राये श्रमदान कर स्वछता अभियान चलाती है इसके लिए किसी को बाध्य नही किया जा सकता।
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