संवाददाता रिपोर्ट रामा नन्द तिवारी दिल्ली

राजधानी दिल्ली में गाजीपुर में एसएचओ ने जहां अपने इलाक़े को क्राइम फ्री करने की मुहीम में बहुत हद तक कामयाबी हासिल की है
नई दिल्ली: जो काम जनता के रहनुमाओं को करना चाहिए था वो पुलिस की वर्दी में एक अफसर कर रहा है. देश की राजधानी दिल्ली में गाजीपुर में एसएचओ ने जहां अपने इलाक़े को क्राइम फ्री करने की मुहीम में बहुत हद तक कामयाबी हासिल की है वही जनता को पुलिस से सीधे अपनी परेशानी के लिए थाने में ही प्रत्येक महीने आरडब्लूऎ और सामाजिक संस्थाओं से मिलकर मीटिंग ही नहीं करते बल्कि उस मीटिंग में आने वाली समस्याओं से वाकिफ होने खुद भी निकल पड़ते है. उन्होंने अपना नंबर जनता में दे रखा है और उनका कहना है की जनता उनको कभी भी फ़ोन कर अपनी समस्या बता सकती है. अपने सहयोगियों के साथ देर रात गश्त करना लगभग रोज़ के मामूली सा हो गया है. यही वजह है की गाजीपुर में अपराधी या तो जेल में है या फिर इलाक़े से बाहर शरण लेने को मजबूर हो रहे हैं. इलाक़े की यातायात समस्या के समाधान के लिए वो खुद इलाक़े के रहनुमानों से संपर्क साध कर हमेशा डिवाइडर को लगवाना उनकी खासियत गिनी जाती है. थाने में मेडिकल कैंप का आयोजन करना और सैकड़ों लोगो को दवाओं की व्यवस्था के साथ ज़रुरत मंद लोगो को ख़ामोशी से टेस्ट के लिए अपनी तरफ से रकम की मदद भी कर देते है. प्रेम सिंह नेगी जितना सड़क पर सक्रीय रहते है उतना है सोशल मीडिया में भी सक्रीय रहते है. उनका सोशल मीडिया पर गाजीपुर की जनता से अपील और सुझाव लगातार जारी रहता है. वो सोशल मीडिया पर मिलने वालों पर सुझाव पर भी अमल करने में नहीं चूकते, चाहे वो विभाग के किसी कर्मचारी की क्यों ना हो. 
प्रेम सिंह नेगी की जब गाजीपुर थाने में पोस्टिंग की खबर मिली तो उस खबर के साथ ये खबर भी मिली की गाजीपुर में गोली का चलना आम बात है. ये गिरोह गोली की दहशत दिखाकर मकान और ज़मीन पर कब्ज़ा करता था. जिससे दहशत का माहौल हमेशा बना रहता है, उन्होंने ठाना की गाजीपुर को क्राइम फ्री बनाना है. उसी कड़ी में हमने इलाक़े के बदमाशों को चेतावनी दी कि या गाजीपुर छोड़ दे या जेल जाएं, शुरू में तो परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन जब कई बड़े शातिर बदमाशों को जेल का रास्ता दिखाया तब अपराध थमा.  प्रेम सिंह नेगी  कहते है कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत हम ज्यादा से ज्यादा लोगो की इंसानियत के तहत मदद की पहल करते है, हम भी इंसान है हमको भी दुःख और सुख का एहसास होता है और जब कोई बुज़ुर्ग थाने में आकर दुआ देते हुए सर पर हाथ फेरता है तो हमको दिल्ली पुलिस में रहते हुए इंसानियत के प्रति काम करने पर फक्र होता है. हम चाहते हैं कि गाजीपुर क्राइम फ्री रहे, यही वजह है की जब से हमने यहां का चार्ज लिया है तब से आज तक आम आदमी को कुर्सी और बदमाशों को हवालात का रास्ता दिखाया है.
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