नई दिल्ली 10 अक्टूबर: कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ न्यूज़पेपर एंड न्यूज़एजेंसी एम्प्लाइज आर्गेनाईजेशन के आह्वान पर जंतर मंतर पर मीडियाकर्मियों का विशाल प्रदर्शन हुआ । जिसमें देशभर से आए लगभग एक हजार मीडियाकर्मियों ने एक स्वर से सरकार से मांग की कि वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट को समाप्त करने के बजाय उसमें व्यापक संशोधन किया जाए। ज्ञातव्य हो कि वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट एक विशिष्ट कानून है, जिसकी तुलना किसी अन्य क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक कानून से नहीं की जा सकती है । यद्यपि श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने स्पष्ट शब्दों में कॉन्फ़ेडरेशन के प्रतिनिधि मंडल को बताया कि मीडियाकर्मियों को प्राप्त होने वाली सुविधाओं और अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा, यह आशंका इसलिए बनी हुई है कि वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट को प्रस्तावित कोड के साथ समाहित किया जा रहा है 
 जिसमें 13 अन्य ऐसे कानूनों को समाहित किया जा रहा है जिनकी कार्यपद्यति मीडियाकर्मियों की कार्यपद्यति  से एकदम भिन्न है।   
सभा का संचालन आई एफ डब्ल्यू जे के उपाध्यक्ष हेमंत तिवारी ने किया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दिल्ली से मीडियाकर्मियों ने अद्भुत उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने घोषणा की कि कॉन्फ़ेडरेशन की अगली बैठक शीघ्र ही शिमला या चंडीगढ़ में आयोजित की जायेगी, जिसमें मीडिया कर्मियों की समस्याओं पर विस्तार से विचार किया जाएगा।  
सभा की अध्यक्षता कॉन्फ़ेडरेशन के महासचिव एम एस यादव ने की।  कॉन्फ़ेडरेशन के सभी घटकों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारी मीडिया कर्मियों को सम्बोधित किया, जिसमें आल इंडिया न्यूज़पेपर एम्प्लाइज फेडरेशन के जी भूपति, इंडियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के परमानन्द पाण्डेय ओर रिंकू यादव, नेशनल फेडरेशन ऑफ़ न्यूज़पेपर एम्प्लाइज के श्याम बाबू,
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