लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास । क्या नागरिक संशोधन विधेयक संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है आइए जानें ।  

मुजफ्फरनगर । लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल 2019 पर देर रात तक चर्चा के बाद लोकसभा में बहुमत से पास कर दिया गया नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के बारे में कहा जा रहा है कि यह संविधान की धारा 14 और 15 का उल्लंघन है और इस आधार पर इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है । आपको बताते चलें कि भारत के संविधान में अनुच्छेद 14 के तहत समानता का अधिकार दिया गया है ।उसमें साफ कहा गया है कि राज्य किसी भी व्यक्ति को कानून के तहत समान संरक्षण देने से इनकार नहीं करेगा । इसमें नागरिक और गैर नागरिक दोनों शामिल हैं । अनुच्छेद 14 की यह मांग कभी नहीं रही कि एक कानून बनाया जाए लेकिन हम सभी इस बात को जानते हैं कि देश में जो सत्तारूढ़ दल है । वह एक देश एक कानून एक धर्म और एक भाषा की बात करता रहा है हमें समझना होगा कि अनुच्छेद 14 यह मांग नहीं करता कि लोगों के लिए एक कानून हो बल्कि देश में अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग कानून हो सकते हैं । लेकिन इसके पीछे आधार सही और जायज होना चाहिए । अगर वर्गीकरण हो रहा है तो यह धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए । यह आधुनिक नागरिकता और राष्ट्रीयता के खिलाफ है हमारा संविधान धर्म के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव और वर्गीकरण को गैरकानूनी समझता है मैं यह समझता हूं कि नागरिक संशोधन विधेयक बहुत खतरनाक है । आज धर्म के आधार पर भेदभाव को जायज ठहराया जा रहा है तो कल जाति के आधार पर भी भेदभाव और वर्गीकरण को जायज ठहराया जाएगा हम आखिर देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं संविधान के अनुसार लोगों को इस तरह से बांटने और वर्गीकरण का कोई उद्देश्य होना चाहिए और वह न्यायोचित होना चाहिए यह बात साफ है कि हमारा उद्देश्य न्यायोचित नहीं है देश के जो समझदार लोग हैं वह यह देख रहे हैं कि देश गलत दिशा में जा रहा है किसी बिल के द्वारा संविधान के मूलभूत ढांचे को नहीं बदला जा सकता है यह एक मामूली कानून है जिसके लिए आप संविधान का ढांचा नहीं बदल सकते भारत के संविधान के अनुसार अगर संसद किसी कानून को पारित करती है तो इसका मतलब यह संवैधानिक है लेकिन बहुसंख्यक वाद के कारण कई बार संसद गलत कानून बना देती है और फिर न्यायपालिका न्यायिक समीक्षा की ताकत का इस्तेमाल करते हुए अंकुश लगाते हैं और संविधान को बचाते हैं संविधान के भाग 3 में भारत के नागरिकों और भारत में रहने वालों के कई मौलिक अधिकारों की बात है अनुच्छेद 13 कहता है ना तो संसद और ना ही सरकार या कोई राज्य ऐसा कोई कानून नहीं बना सकता है जिससे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता हो भारत एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है यहां किसी के भी साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है आपको बता दें कि सरकार ने इस विधेयक को लोकसभा में आसानी से पास करवा लिया लोकसभा में बीजेपी के पास बहुमत है इस विधेयक पर वोटिंग के दौरान बीजेपी के 303 लोकसभा सदस्यों समेत कुल 311 सांसदों का समर्थन हासिल हुआ अब राज्यसभा में इस विधेयक को रखा जाना है जहां से पास होने की स्थिति में ही यह कानून की शक्ल लेगा लेकिन सत्ताधारी पार्टी के लिए राज्यसभा की डगर लोकसभा जितनी आसान नहीं है राज्यसभा में कुल 245 सांसद होते हैं हालांकि वर्तमान सांसदों की संख्या 240 है ऐसे में नागरिकता संशोधन विधेयक बहुमत पाने के लिए 121 सांसदों का समर्थन चाहिए भाजपा के पास कुछ 83 राज्यसभा सांसद है मतलब साफ है कि इस विधेयक को कानून की शक्ल देने के लिए बीजेपी को राज्यसभा में अन्य 37 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा तब यह बिल पास हो सकता है जबकि बीजेपी  के सहयोगी दल शिवसेना भी इस बिल के विरोध में है ।
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