रिपोर्ट ब्रह्मानंद चौधरी ब्यूरो चीफ हरिद्वार के साथ में रुड़की से इरफान अहमद की रिपोर्ट
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 उच्च सदन में इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि 105 सांसदों ने इसके ख़िलाफ़ मतदान किया। बिल पर वोटिंग से पहले इसे सेलेक्ट कमिटी को भेजने के लिए भी मतदान हुआ, लेकिन यह प्रस्ताव गिर गया।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत की मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया नागरिकता संशोधन विधेयक को इस देश की राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई है। उच्च सदन में इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि 105 सांसदों ने इसके ख़िलाफ़ मतदान किया। बिल पर वोटिंग से पहले इसे सेलेक्ट कमिटी को भेजने के लिए भी मतदान हुआ, लेकिन यह प्रस्ताव गिर गया। सेलेक्ट कमिटी में भेजने के पक्ष में महज 99 वोट ही पड़े, जबकि 124 सांसदों ने इसके ख़िलाफ वोट दिया। इसके अलावा संशोधन के 14 प्रस्तावों को भी सदन ने बहुमत से नामंज़ूर कर दिया। अब भारतीय राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह बिल ऐक्ट में तब्दील हो जाएगा। इस बिल को सोमवार रात को लोकसभा से मंज़ूरी मिली थी।
उल्लेखनीय है कि, शिवसेना, बीएसपी ने किया सदन से वॉकआउट ,दिलचस्प बात यह रही कि लोकसभा में बिल का समर्थन करने वाली शिवसेना के तीन सांसदनों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। बता दें कि लोकसभा में बिल का समर्थन करने को लेकर महाराष्ट्र में उसके साथ सरकार चला रही कांग्रेस ने शिवसेना से आपत्ति जताई थी। इसके अलावा बीएसपी के दो सांसदों ने भी वोटिंग का बहिष्कार किया।
इस बीच भारतीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विधेयक को राज्यसभा में पेश किया और जिसके बाद सदन में काफ़ी हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इसे अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने वाला बताया। विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने पूछा कि इस बिल में केवल तीन देशों का और सिलेक्टिव धर्मों का ही चुनाव क्यों किया गया है। आज़ाद ने कहा कि भूटान, श्रीलंका और म्यांमार में भी हिंदू रहते हैं और अफ़ग़ानिस्तान के मुसलमानों के साथ भी अन्याय हुआ लेकिन उनको विधेयक के प्रावधान में शामिल नहीं किया गया है।
ज्ञात रहे कि इस नए क़ानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए ग़ैर-मुस्लिम शरणार्थियों को इस बिल में नागरिकता देने का प्रस्ताव है। इस बिल में इन तीनों देशों से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है।
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