सुबह की किरण शाम की आस है ।
यह वक्त बस जिंदगी की तलाश है ।।
नहीं है दुनिया में कोई अपना पराया ।
वही बनता दुश्मन जो अपना खास है।।
साल आएंगे जाएंगे वक्त रुकेगा नहीं ।
यह इंसान है जो वक्त का ही दास है ।।
कुछ देंगे आज नव वर्ष की बधाईयां ।
कुछ करेंगे उन्हें मिस जो नहीं पास है ।।
होगा जो मुकद्दर में मिलेगा भी वही ।
करता रह वही जो तुझको रास है ।।
पासे पलटते चलते रहेंगे ये सब लोग ।
आज तुम्हारा कल उसका खास है ।।
नहीं डूबी है अभी उम्मीद की किरण ।
बड़ी है जमीं बहुत बड़ा आकाश है ।।
जो भी पढ़े उसी को नई साल मुबारक ।
लिख दिया वही जो भी अपने पास है ।।
लाएं कहां से हम पारखी नजर हसन ।
अपना खास ही करता सत्यानाश है ।।

लेखक:- मौहम्मद हसन खान
संपादक कलछीना टाइम्स व केटी लाइव न्यूज़
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