गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश में 2011 जनगणना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र की आबादी 77 प्रतिशत से अधिक है । ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमों की कमी दूर करने के लिए प्रदेश सरकार अनेक योजनायें संचालित कर रही है । कोई उद्योग व रोजगार की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होना स्वाभाविक है । सरकार जहां प्रदेश के युवक/युवतियों को विभिन्न टेªड्स में प्रशिक्षण दिलाकर स्वउद्यम लगाने हेतु आर्थिक सहयोग, ऋण आदि देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का कार्य कर रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती बेरोजगारी का समाधान करने तथा अधिक से अधिक रोजगार का अवसर गांव में ही उपलब्ध कराने के ध्येय से ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग लगाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना संचालित की है । जिसमें व्यक्तिगत उद्यमियों को पूंजीगत ऋण रु0 10 लाख तक की वित्तीय सहायता बैंकों के माध्यम से प्रदान की जाती है ।
मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अन्तर्गत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को पूंजीगत ऋण 4 प्रतिशत से अधिक ब्याज की धनराशि ब्याज उपादान के रूप में उपलब्ध कराई जाती है तथा अन्य सभी उद्यमियों द्वारा बैंकों को देय समस्त ब्याज अनुदान के रूप में सरकार द्वारा भुगतान किये जाने का प्राविधान है । सरकार द्वारा संचालित इस योजनान्तर्गत आई0टी0आई0, पाॅलिटेक्निक संस्थाओं से तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त बेरोजगार नवयुवक नवयुवतियों को लाभान्वित करने के लिए प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा शिक्षित बेरोजगार जिनकी सरकारी सेवा हेतु आयु समाप्त हो गई हो, एस0जी0एस0वाई0 तथा शासन की अन्य योजनान्तर्गत प्रशिक्षित अभ्यर्थी, परम्परागत कारीगर, स्वतः रोजगार में रूचि रखने वाली महिलाएं, व्यावसायिक शिक्षा के अन्तर्गत ग्रामोद्योग विषय से उत्तीर्ण अभ्यर्थी, संबंधित जिले के सेवायोजन कार्यालय में  पंजीकरण कराये हुए अभ्यर्थियों को भी इस योजना में लाभान्वित किया जाता है। लाभार्थियों का चयन उ0प्र0 खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड/शासन द्वारा गठित चयन समिति के माध्यम से सम्बंधित जिले के लिए होता है। लाभार्थी की आयु 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
प्रदेश सरकार इस योजना के अन्तर्गत 50 प्रतिशत तक        अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग के लाभार्थियों को लाभान्वित करती है। उद्यमी के चयन के समय सम्बंधित उद्योग में स्थानीय कच्चे माल की उपलब्धता का आंकलन भी किया जाता है तथा स्थानीय उपभोक्ताओं की दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुओं के उत्पादन करने वाली इकाईयों को वरीयता दी जाती है। इस योजनान्तर्गत सभी पात्र उद्यमियों को सावधि ऋण कार्यशील पूंजी सम्मिलित करते हुए रु0 10 लाख तक के बैंक ऋण पर ब्याज उपादान दिया जाता है। उद्यम स्थापना के समय सामान्य वर्ग के उद्यमियों को प्रोजेक्ट लागत का 10 प्रतिशत तथा अन्य वर्ग के उद्यमियों को प्रोजेक्ट लागत का 5 प्रतिशत अंशदान स्वयं वहन करना होता है।
प्रदेश सरकार की रोजगारपरक इस योजना का लाभ प्रदेश के युवक/युवतियां ले रहे हैं। इस योजनान्तर्गत जहां स्थाई रूप से उद्योगों की स्थापना हो रही है, वहीं हजारों लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजनान्तर्गत प्रदेश में वर्ष 2018-19 में 4215.07 लाख रु0 का पूंजी निवेश करते हुए 809 उद्योग इकाईयां स्थापित हुई और 16863 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। चालू वित्तीय वर्ष में रु0 4000.00 लाख से अधिक पूंजी निवेश, 800 से अधिक उद्योग इकाईयां स्थापित एवं 16 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है।
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