उत्कृष्ट सांसद एवं पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित वरिष्ठ नागरिक पूर्व मंत्री, भारत सरकार हुक्मदेव नारायण यादव ने बयान जारी कर देश के राष्ट्र प्रेमी नागरिकों से अनुरोध किया है कि इस संकट का मुकाबला संयम,आत्मानुशासन और आध्यात्मिक शक्ति के द्वारा ही किया जा सकता है । नवरात्र में प्रधानमंत्री केवल नींबू और पानी पर ही रह कर अपना काम करते हैं । दुनिया के सम्पन्न और समृद्ध तथा विकसित राष्ट्र करोना से युद्ध मे हार गए हैं । क्या भारत अपने त्याग, संयम, आत्मानुशासन और आध्यात्मिक तेज से इसको जीतने में सफल नहीं हो सकता हैं ? राष्ट्र के सभी नागरिकों को संकल्प लेना है। दुनिया का कोई देश किसी दूसरे देश की मदद नही कर रहा है। इस हालत में भारत के नागरिकों को आत्मचिंतन करना चाहिए। सांसद, विधायक, सरकारी कर्मचारी और अधिकारी, व्यापारी, उद्योगपति तथा सभी पेंशनभोगी त्याग नही कर सकते हैं। देश के धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के पास सम्पत्ति हैं। धार्मिक स्थानों के खजाने में इतना पैसा है कि भारत सरकार के सालाना बजट से भी ज्यादा है। इन धार्मिक स्थानों में जमा दौलत किस काम के लिए हैं। इस समय राष्ट्र भयंकर संकट में है। राष्ट्र के नागरिक बचेंगे तभी सभी कुछ बचेंगे। ईश्वर की इक्षा और प्रेरणा से राष्ट्र के नागरिकों ने धार्मिक संस्थानो में दान दे कर धन को संचित कोष में जमा किया था। गीता में भगवान कृष्ण ने इसी संकट के समय के निर्देश दिया था कि देश, काल और पात्र के अनुसार यज्ञ, दान और तप करें। अभी वह समय आ गया है। हम अपनी संतानों और भावी पीढ़ियों के लिए त्याग नही कर सकते हैं ? राष्ट्रधर्म क्या कह रहा है ? स्वयं लोग घोषणा करें और प्रधानमंत्री राहत कोष में स्वेक्षा से दान करें। श्री यादव ने कहा है कि प्रथम क़िस्त में वे अपना एक माह का पूर्व सांसद पेंसन देने की घोषणा करते हैं । भारत अपने आध्यात्मिक तेज के बल पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इस दैहिक, दैविक और भौतिक ताप को सहन कर विश्वगुरु बनेगाय ।
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