रिपोर्ट ब्रह्मानंद चौधरी ब्यूरो चीफ हरिद्वार
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                  ओर भारत के समस्त राज्य भी आज पूर्ण रुप से लौकडौन है सरकारें अपने नागरिकों की सुरक्षा मे कोई कोताही नही बरतना चाहती शासन प्रशासन ईस महामारी को मात देने के लिये पूर्ण रुप से चुस्त दुरुस्त है देश के नागरिक अपने अपने घरों मे कैद होकर ईस महामारी को मात देने के लिये लौकडौन का पूर्ण रुप से पालन कर रहे हैं लेकिन ईस लौकडौन का सबसे ज्यादा असर उन आवारा लावारिस बेजुबान पशुओं पर पडा जो खाद्य प्रतिष्ठान होटल ढाबे रेहडी ठेलियों के बंद होने से जो पहले ईन प्रतिष्ठानों के बचे खुचे खाने से अपना पेट भर लेते थे आज आजिविका की तलास मे दर दर भटकने को मजबुर हैं व हर रोज भूख प्यास से बीमार होकर न जाने कितने बेजुबान जानवर काल के मुंह मे समा रहे हैं

ईन बेजुबानों की दुर्दशा से ब्यथित होकर यमकेस्वर ब्लाक के बूंगा गांव के निवासी सामाजिक कार्य कर्ता व पशु प्रेमी श्री जगदीश भट्ट जी आगे आये व अपने निजि संसाधनों से ईन आवारा पशुओं को संरक्षण देने के लिये बिगत तीन दिन से हर रोज रीसीकेष से गरुड चट्टी तक घुम रहे सैकडों गाय बैल व कुत्तों को भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं जहां पशुओं को हर रोज कुंतलौं के हिसाब से हरी बर्सीम व चर्री खिला रहे हैं वही आवारा कुत्तों के लिये उन्होने प्रचुर मात्रा मे प्रोटीन युक्त

  विशेष भोजन पैडीगिरी की ब्यवस्था कर उन्हे खिलाने का कार्य कर रहे हैं पहले दिन ईन पशुओं को भोजन उपलब्ध कराने के दौरान श्री जगदीश भट्ट जी को पानी की समस्या नजर आयी जिस पर उन्होने त्वरित कार्यवाही करते हुये कई स्थानों पर पानी के टब लगवाने का संकल्प लिया ताकी जानवर भोजन के बाद पानी पीकर सुकुन प्राप्त कर सके व अगले दिन उनके द्वारा ये ब्वयवस्था  भी कर दी गयी
श्री जगदीश भट्ट जी के भतीजे पूर्व सैनिक व बर्तमान मे अपने क्षेत्र के जन प्रतिनिधि क्षेत्र पंचायत सदस्य सुदेश भट्ट जी से बातचीत के दौरान हमे पता चला कि हर रोज पशुओं की सेवा के दौरान कई घायल व बीमार पशु सडक किनारे पडे हुये नजर आते हैं जिनमें से कईयों ने बीमारी के कारण भोजन ग्रहण करना भी त्याग दिया है जिसका ज्वलंत उदाहरण कल लक्ष्मण झूला चौक पर एक गाय ने बीमारी के चलते दम तोड दिया जहां ईस समय मानव प्रजाति की रक्षा के लिये शासन प्रसाशन बहुत ही सराहनीय कार्य कर रही है वहीं ईन बेजुबान जानवरों का अस्तित्व खतरे मे पड गया जबकि सरकार द्वारा पशुधन को बचाने के लिये बर्तमान परिस्थितियों मे अपने क्षेत्रिय पशु चिकित्सकों को निर्देश दिया जाना चाहिये था जिससे चिकित्सा के अभाव मे किसी भी बेजुबान पशु की मृत्यु न हो

 श्री जगदीश भट्ट जी ने सरकार से आह्न किया कि उनके द्वारा आवारा पशुओं के संरक्षण व उनके भरण पोषंण के ईस अभियान मे सहयोग हेतु एक पशु चिकित्सक मुहैय्या कराया जाय ताकी किसी भी बीमार व घायल पशु को ईस विकट परिस्थिति मे चिकित्सा प्रदान कर उनका जीवन बचाया जा सके

श्री जगदीश भट्ट जी के पशु प्रेम का अंदाजा ईसी बात से लगाया जा सकता है कि जब भी सडकों पर आते जाते उनको कोई बीमार घायल  कुत्ता नजर आया तो वे उसे तत्काल उठाकर अपने आवास पर ले आते हैं आज उनके ईसी पशु प्रेम का उदाहरण
है कि अपने आवास पर उनको पचास से ज्यादा कुत्तों की सेवा भाव व संरक्षण प्रदान करते हुये देखा जा सकता है ये पशु सेवा जब तक लौकडौन है श्री भट्ट जी के द्वारा निरंतर जारी रहेगी यैसे  नेक दिल ईंसान वाकई हमारी देवभूमि रीसीकेष की शान हैं जिनकी निस्वार्थ सेवा की चर्चा प्रदेश ही नही बल्कि पुरे देश मे हो रही है
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