रिपोर्ट ब्रह्मानंद चौधरी ब्यूरो चीफ हरिद्वार के साथ में रुड़की से इमरान देशभक्त की रिपोर्ट
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               बल्कि जुमा की नमाज़ की तरह चार लोग मस्जिदों और घरों में ही अदा करेंगे।सर्वधर्म त्यौहार कमेटी के संयोजक व शायर अफ़ज़ल मंगलौरी ने बताया कि मदरसा अरबिया रहमानिया में मुफ़्तियों के ग्रुप की बैठक फ़तवा विभाग में हुई,जिसमें ईद की नमाज़ के सम्बंध में उन्होंने फतवा तलब किया,जिसपर मुफ़्ती सलीम अहमद,मुफ़्ती मौलाना तौक़ीर आलम और सदर मदर्रिस मौलाना मो.अरशद कासमी ने कहा कि दारुलउलूम देवबंद और दूसरे भारतीय मुस्लिम संस्थानों के फैसले की रोशनी में रुड़की इंतेजामिया ने यही निर्णय लिया है कि ईदगाह में सामूहिक ईद की नमाज़ नहीं होगी,बल्कि मदरसा के चार लोग इमाम की क़यादत में नमाज़ अदा करेंगे और साथ ही मस्जिदों में व अपने-अपने घरों में निर्धारित सरकारी तादाद के अनुसार ईद की नमाज़ अदा कर सकेंगे,साथ ही जो लोग ईद की नमाज़ अदा कर पाने में असमर्थ हैं वे घर पर चार रकात नमाज़ चाशत अदा करें।मंगलौरी ने ये भी बताया कि मुफ़ीतियाने इकराम ने मुसलमानों से ये भी अपील की है कि वे ईद की मुबारकबाद के लिए अपने मिलने वालों और दोस्तों के घरों पर न जाकर मोबाइल पर ही ईद की मुबारकबाद पेश करें।मुफ़्ती सलीम अहमद ने सभी मुसलमानों से अपील की कि अपने मुल्क हिंदुस्तान से कोरोना महामारी से निजात,देश के विकास और आपसी सौहार्द के लिए रमज़ान के आखरी अशरे में विशेष दुआ करें, वहीं दूसरी ओर नगर के प्रमुख लोगों द्वारा भी ईद उल फितर की नमाज अपने घरों में ही अदा करने की अपील की गई है। कोरोना संकट को देखते हुए इस समय देश भर में लोकडाउन तथा सोशल डिस्टेंसिंग लागू है तो इसी बीच मुस्लिमों का पवित्र महीना रमजान भी चल रहा है,विधायक काजी निजामुद्दीन,हाजी फुरकान अहमद,कारी शमीम अहमद,मुनव्वर हुसैन, मौलाना नसीम कासमी, हाजी नौशाद अली,डॉक्टर जीशान अली,हाजी सलीम खान,डॉक्टर नैयर काजमी, जावेद अख्तर एडवोकेट, राव शेर मोहम्मद खा,हाजी लुकमान कुरैशी,डॉ.मोहम्मद मतीन,शेख अहमद जमा, फखरे आलम खान,पार्षद मोहसीन अल्वी,मोहम्मद जावेद फैंसी,भूरा प्रधान अब्दुल वहीद,अलीम सिद्दीकी व डॉ.फुरकान अली ने अपनी अपील में कहा कि लोकडाउन का पालन कर अल्लाह की इबादत करें तथा सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करें और ईद का त्यौहार लोग अपने घरों में ही मनाएं।उन्होंने कहा कि ईद पर गले ना मिल खुद को अलग रखें और बाजार में भीड़ बढ़ाने से बचें।कहा कि रमजान का महीना पाक महीना है इस मुकद्दस महीने में जकात, सदका और खैरात का विशेष महत्व है,जिसमें गरीबों,जरूरतमंदों,परेशानहाल और मोहताज लोगों की मदद की जाती है।
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