रिपोर्ट ब्रह्मानंद चौधरी ब्यूरो चीफ हरिद्वार के साथ में रुड़की से इमरान देशभक्त की रिपोर्ट
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              रुड़की।मंगलौर में गत 800 वर्षों से पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद साहब के पवित्र "बाल मुबारक "की ऐतिहासिक ज़ियारत अलविदा जुम्मा के दिन लोकडाउन के चलते सादगी के साथ सिर्फ परिवार के सदस्यों द्वारा ही की गई।इसके साथ ही मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हसन के परपोते (प्रपोत्र) हज़रत अब्दुल क़ादिर जीलानी के बाल मुबारक की ज़ियारत भी कराई गई और अपने भारतवर्ष व संसार से कोरोना महामारी के खात्मे की दुआ भी की गई।हज़रत मोहम्मद साहब के पवित्र बाल मुबारक की ज़ियारत गत 800 वर्षों से मंगलौर में काज़मी परिवार में नियमित रूप से रमज़ान के आखरी जुमा(अलविदा जुमा) को होती आरही है,जिसमें हज़ारों की संख्या में लोग हर साल ज़ियारत करते थे।सर्वधर्म त्यौहार कमेटी के संयोजक व अंतरराष्ट्रीय शायर अफ़ज़ल मंगलौरी ने बताया कि काज़मी परिवार के वरिष्ठ सदस्य जमाल काज़मी द्वारा ये ज़ियारत कराई जाती है।
ज़ियारत से पूर्व पिरान कलियर के चलते हुए कुंए से पानी लाया जाता है जो एक कटोरी में भर कर पवित्र बाल मुबारक (जोकि एक लकड़ी की नली में मौजूद है)को पानी की कटोरी के निकट किया जाता है,जिससे बाल मुबारक कटोरी के पानी में आ जाते हैं,जिसकी सभी ज़ियारत करते हैं और दुआएं मांगते हैं।जमाल काज़मी के मुताबिक 800 वर्ष पूर्व उनके परिवार के बुजुर्ग सैयद हातिम अली काज़मी का विवाह दिल्ली के सुल्तान गयासुद्दीन बलबन की पोती नजिफुन्नीसा के साथ हुआ था,जिनको बतौर तोहफा व दहेज सिर्फ ये पवित्र बाल मुबारक बादशाह द्वारा भेट किये गए थे,तब से ये ज़ियारत की परंपरा चली आरही है।काज़मी के अनुसार लगभग 300 वर्ष पूर्व ये बाल मुबारक उनके परिवार से अचानक गायब हो गए थे उसी दौरान उनके परिवार के एक सूफी धार्मिक महिला हज करने गई और मदीने में हज़रत मोहम्मद साहब के मज़ार पर दुआ की कि उनके परिवार को फिर से बाल मुबारक की ज़ियारत मिल जाये तभी उनको सपने में कहा गया कि अपने कुरान शरीफ में देखो,तब उनको कुरान शरीफ जो उनके पास था ये बाल मुबारक मिल गया तब से औरतों को भी ज़ियारत की इजाज़त हुई वरना इससे पहले सिर्फ पुरुषों को ही ज़ियारत होती थी।लोकडाउन के कारण सैकड़ों लोग ज़ियारत से महरूम रहे,क्योंकि पहले से ही ये एलान कर दिया गया था कि इस बार अवामी सामूहिक ज़ियारत नही करायी जाएगी।इसके अलावा मंगलौर के विधायक काज़ी निज़ामुद्दीन के घर पर भी लोकडाउन के कारण आखरी जुमे के अवसर पर 150 पुराने काबा शरीफ के"पवित्र  गिलाफ़"की ज़ियारत भी  सार्वजनिक रूप से नहीं कराई जा सकी,सिर्फ परिवार के लोगों ने ही गिलाफ़ के दर्शन किये।इस अवसर पर काज़ी नूरुद्दीन,  काज़ी सिराजुद्दीन,अफ़ज़ल मंगलौरी,अमजद काज़मी,डॉ.अंजुम काज़मी, जावेद काज़मी,शाहरुख अफ़ज़ली,फहद काज़मी,फरहाद काज़मी,हम्माद सिद्दीकी, नज्म काज़मी,शरीक सुल्तान रोज़ेदार,खुर्रम काज़मी,हम्माद काज़मी,आदिल काज़मी,उमर काज़मी आदि लोगों ने ज़ियारत की और देश में विकास,उन्नत्ति,कोरोना से निजात और आपसी सदभाव के साथ साथ देश की सुरक्षा के लिए दुआ की।
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