रिपोर्ट ब्रह्मानंद चौधरी ब्यूरो चीफ हरिद्वार
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                            उन्होंने कहा कि जहां पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है, वहीं प्रदेश सरकार ने अभिभावकों से ट्यूशन फीस के लिए स्कूल संचालकों को निर्देश जारी कर दिए, जो इस संकट की घड़ी में जनता के ऊपर सरकार ने सीधा-सीधा दोहरी मार का वार किया है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकटकाल के चलते स्कूल, कॉलेजों को पूर्णता बंद रखने के आदेश सरकार द्वारा जारी किए गए थे। तो स्कूल संचालकों ने सरकार के समक्ष अपना रोना रो दिया था, इस ओर सरकार ने सांठ गांठ के चलते उन्हें निर्देशित कर दिया कि वह सिर्फ ट्यूशन फीस ही वसूलेंगे। अब यह आदेश पाकर स्कूल संचालक फुले नही समा रहे है, जबकि अभिभावक अपने को ठगा सा महसूस कर रहे है। वह इसलिए कि जिस ट्यूशन फीस को वसूलने के सरकार ने स्कूल संचालकों को निर्देश दिए, वह स्कूल फीस के मुकाबले लगभग 90 प्रतिशत बैठती है। अब सरकार ने एक बार फिर अभिभावकों के साथ छल करके स्कूल संचालकों को फायदा पहुंचाने का काम किया। कांग्रेसी नेता लवी त्यागी ने कहा के प्रदेश सरकार बार-बार अपने आदेशों से मुकर रही है जिसका बड़ा नुकसान अभिभावकों और जनता को उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार अभिभावकों के हितकारी लुभावनी घोषणा तो जरूर जारी कर रही है लेकिन इनका लाभ अभिभावक बिल्कुल नहीं ले पा रहै है। वह इसलिये की सरकार घोषणा के तुरंत बाद ही ऐसा भी आदेश पारित कर देती है, जिससे स्कूल संचालकों को फायदा होता है। साथ ही कहा कि सरकार को अभिभावको से ज्यादा चिंता स्कूल संचालकों की है, क्योंकि अगर वह घाटे में चले गए तो शायद सरकार को कमीशन खोरी ना मिले। जबकि भारतीय संविधान में भी लिखा है कि यहां शिक्षा का किसी व्यवसाय या घाटे/मुनाफे से कोई संबंध नही है। उन्होंने कहा कि स्कूल संचालक प्रदेश सरकार के ही आदेशो को ठेंगा दिखाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ते, क्योंकि सरकार ने स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी की किताबें ही लगाने के आदेश दिए हुए है और स्कूल संचालक प्राइवेट पब्लिकेशन की ही पुस्तकें पढा रहे है। साथ ही बताया कि पूर्व में शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे द्वारा भी फीस स्लैब तैयार किया गया था, वह भी आज तक स्कूलों में लागू नही हो पाया। यह स्कूल संचालक ही सरकार के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे है। जो शिक्षा मंत्री के मुंह पर सीधा सीधा एक तमाचा है।
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