रिपोर्ट ब्रह्मानंद चौधरी ब्यूरो चीफ हरिद्वार
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          वित्तविहीन विद्यालयों में शिक्षा विभाग के गृह परीक्षा संपादित होने के पश्चात से आज तक विद्यालयों को अभिभावकों द्वारा किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं दिया जा रहा है और प्रदेश के लगभग लाखों की संख्या में छात्र-छात्राएं वित्तविहीन विद्यालयों में अध्ययनरत हैं और वित्तविहीन विद्यालयों में अध्यापक ,अध्यापिकाओं की संख्या भी अधिकतम है जिनके घर परिवार का लालन पोषण  मानदेय पर निर्भर करता है जिसके लिए लॉक डाउन  मे सरकार राज्य सरकार 500000/- की धनराशि प्रत्येक वित्तविहीन विद्यालयों को कर्मचारी स्टॉप अध्यापकों एवं अन्य के वेतन के लिए दिए जाएं विद्यालयों को सेनीटाइज, मास्क, थर्मल स्कनर, आदि उपकरण प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने चाहिए संगठन प्रतिनिधिमंडल संगठन प्रतिनिधि मंडल ने माननीय मंत्री से शिक्षा विभाग के आदेशों की लगातार विभाग द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और शिक्षा का अधिकार के अंतर्गत मिलने वाली धनराशि अभी तक विभाग द्वारा अवमुक्त नहीं की गई है और  लोग डाउन की अवधि में भी अपने अपने संस्थानों का कमर्शियल बिल भुगतान कर रहे हैं जिनको माफ, करने जिन जिन विद्यालयों में बसों की व्यवस्था हैं उनका टैक्स माफ ,करने और इंश्योरेंस की अवधि को 1 साल और बढ़ाए जाने की मांग करने कि वहां राज्य मंत्री और सरकार एवं शिक्षा विभाग से की गई है
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