रिपोर्ट जावेद अंसारी ब्यूरो चीफ उत्तराखंड


भारतीय राजनीति में पहले व्यक्ति जिन्होंने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिए जाने के खिलाफ आवाज बुलंद की। आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस के अवसर पर डॉ. नीरज कौशिक भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला उपाध्यक्ष ने इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशन सहारनपुर में श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए बताया कि, वो थे दिग्गज नेता और भारतीय जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी. आज उनकी पुण्यतिथि है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन 23 जून को आज ही के दिन साल 1953 में हुआ था।
डॉ. नीरज कौशिक ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जवाहरलाल नेहरू से अलग होकर 1951 में भारतीय जन संघ की नींव रखी थी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने के खिलाफ थे। उनका कहना था कि एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान, नहीं चलेंगे। डॉ. मुखर्जी अनुच्छेद 370 के मुखर विरोधी थे और चाहते थे कि कश्मीर पूरी तरह से भारत का हिस्सा बने और वहां अन्य राज्यों की तरह समान क़ानून लागू हो।
डॉ. नीरज कौशिक ने बताया कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने साल 1953 में बिना परमिट के कश्मीर का दौरा किया, जहां उन्हें जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन शेख अब्दुल्ला सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था। इसी दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान के कुछ समय बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जम्मू-कश्मीर में परमिट सिस्टम को खत्म कर दिया था। मुखर्जी के पद चिह्नों पर चलते हुए अब केन्द्र की मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद 370 को संसद में संशोधन करके निष्प्रभावी बना विकास के रास्ते खोल दिये है।
डॉ नीरज कौशिक ने कहा कि आज केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अपना आदर्श मानती है। भारतीय जनता पार्टी का आज भी ये प्रमुख नारा है 'जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है, जो कश्मीर हमारा है, वह सारा का सारा है। इस अवसर पर संस्थान के सभी शिक्षकों ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पुष्पांजलि अर्पित किए। कार्यक्रम में डॉ. रजनी शर्मा, कुलदीप कुमार, नीरज शर्मा, बाबूराम, पारुल तोमर, पूनम, अंकित गुप्ता, पुजा मीणा, सत्यवीर, अनिल आदि उपस्थित थे।
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