वेसे तो सूर्य और चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है मगर ज्योतिष शास्त्र में इनका बहुत महत्व है ग्रहण के वक्त क्या राशि संयोग है इसका सीधा प्रभाव मानव जाति और प्रकृति पर देखता है यह स्थापित तथ्य है कि ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर हुई भविष्यवाणियां सही साबित हुई है इस वर्ष ग्रहण के तोर पर होने वाली यह खगोलीय घटना अपने आप में विशेष है क्योंकि आगामी 5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच में 3 ग्रहण पड़ने जा रहे है यानी एक महिने में तीन ग्रहण दो चंद्र ग्रहण और एक सूर्य ग्रहण एक महिने में तीन या तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाए तो उसे शुभ नहीं माना जाता वही इस अवधि में बन रहा ग्रहों का योग अनिष्ट को लेकर चिंता को बढ़ा रहा है I

चंद्रग्रहण उस घटना को कहते है जब चन्द्रमा और सूर्य के बीच में पृथ्वी आ जाती है तब सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँच पाती तथा पृथ्वी की पूर्ण या आंशिक छाया चाँद पर पड़ती है शास्त्रों में ग्रहण को अशुभ घटना माना जाता है यह घटना सदा सर्वदा पूर्णिमा को ही होती है


उपछाया चंद्रग्रहण 
पेनुमब्रल को उपछाया चन्द्र ग्रहण कहते है उपछाया चंद्रग्रहण ऐसी स्थिति में बनता है जब चन्द्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर उसकी उपछाया मात्र पड़ती है इसमें चंद्रमा पर एक धुंधली सी छाया नजर आती है इस घटना में पृथ्वी की उपछाया में प्रवेश करने से चंद्रमा की छवि धूमिल दिखाई देती है कोई भी चंद्रग्रहण जब भी आरंभ होता है तो ग्रहण से पहले चंद्रमा पृथ्वी की परछाई में प्रवेश करता है जिससे उसकी छवि कुछ मंद पड़ जाती है तथा चंद्रमा का प्रभाव मलिन पड़ जाता है जिसे उपछाया कहते है

 इस दिन चंद्रमा पृथ्वी कि वास्तविक कक्षा में प्रवेश नहीं करेंगे अतः इसे ग्रहण नहीं कहा जायेगा ये पृथ्वी की परछाई से ही बाहर आ जायेंगे इसलिए ग्रहण से सम्बंधित  किसी भी तरह का दोष अथवा दुष्प्रभाव पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों पर लागु नहीं होगा इसलिए इस दौरान सूतक काल का समय नहीं माना जायेगा और गर्भवती महिलाओ को लेकर किसी भी तरह भेद अथवा दोष विचारणीय नहीं होगा

 इस दिन खगोलीय घटना के अनुसार चंद्रमा पृथ्वी की परछाई में प्रवेश करके वहीं से वापस निकल जायेंगे जिसके परिणामस्वरूप चन्द्रमा का बिम्ब केवल धुंधला दिखाई देगा काला नहीं होगा, न ही किसी तरह का ग्रास होगा इसलिए इस दिन पूर्णिमा तिथि से सम्बंधित किये जाने वाले जप-तप, पूजा पाठ आदि सभी कार्य यथावत होंगे 


5 जून 2020 (ज्येष्ठ पूर्णिमा, शुक्रवार) उपछाया चंद्रग्रहण

मिथ्या प्रचार : इस चंद्र ग्रहण का प्रारम्भ रात 11:15 मिनट व समाप्ति 6 जून सुबह 2:34 (कुल अवधि - 3 घंटे 19 मिनट)  पर होगी

सूर्यग्रहण उस घटना को कहते है जब चंद्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच में आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिये ढक जाता है, उसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है

पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चाँद पृथ्वी की ! कभी कभी चाँद, सूरज और पृथ्वी के बीच आ जाता है फिर वह सूरज कि कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है जिससे पृथ्वी पर साया फ़ैल जाता है इस घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है यह घटना सदा सर्वदा अमावस्या को ही होती है

वलयाकार सूर्यग्रहण 

वलयाकार सूर्यग्रहण की वह स्थिति है जब चंद्रमा सामन्य की तुलना में पृथ्वी से अधिक दूर हो जाता है नतीजतन चंद्रमा का आकार इतना नहीं दिखता कि वह पूरी तरह से सूर्य ढक ले वलयाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा के बाहरी किनारे पर सूर्य रिंग यानि अंगूठी कि तरह काफी चमकदार नजर आता है 

21 जून 2020 को सूर्य ग्रहण (  आषाढ अमावस्या, रविवार ) वलयाकार सूर्यग्रहण 

ग्रहणकाल : प्रातः 9:15 मिनट दोपहर 3:03 मिनट तक (कुल अवधि 5 घंटे 48 मिनट )

यह ग्रहण बहुत तहलका मचाने वाला माना जा रहा है वजह यह कि यह ग्रहण ऐसी स्थति में होने जा रहा है जबकि एक साथ छह ग्रह व्रकी यानी अपनी उलटी चाल चल रहे है ये गृह है बुध, ब्रहस्पति, शुक्र, शनि, राहू, केतु, ज्योतिषीय गणना यह कहती है कि छह ग्रहों का व्रकी होना सूर्य ग्रहण के साथ बुरी प्राक्रतिक आपदा विशेष तोर पर अतिवृष्टि और तूफान की वजह से जन धन कि हानि हो सकती है सप्तम भाव में व्रकी गुरु व्रकी शनि और व्रकी प्लूटो मकर राशि में स्थित है देश में बारिश ओले गिरना सड़के नजर न आने जैसी स्थिति बन सकती है अत: किसी प्रकार का भयानक भूकंप आने की आशंका है जो खासतोर पर एशिया से सम्बंधित क्षेत्र में हो सकता है जैसे ईरान, इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन और भारत देश इस में शामिल हो सकते है यदि इसकी वजह से समुद्र में तूफान उठता है तो और भी ज्यादा भयानक हो सकता है इसके अलावा किसी जनांदोलन के नाम पर व्यापक अराजकता भी सूर्य ग्रहण के प्रभाव के तोर पर देखी जा रही है


5 जुलाई 2020 को चन्द्र ग्रहण (आषाढ पूर्णिमा, रविवार) उपछाया चन्द्रग्रहण 

मिथ्या प्रचार : इस चंद्र ग्रहण का प्रारम्भ प्रातः 8:37 मिनट व समाप्ति सुबह 11:22 मिनट  (कुल अवधि – 2 घंटे 45 मिनट) पर होगी

उपाय 

1. ईश्वर की आराधना और वैदिक मंत्रो व गायत्री मंत्र का जाप करे
2. ग्रहण के पश्चात किसी गरीब व्यक्ति को चावल का दान करना चाहिए
3. ग्रहण के पश्चात स्नान करके ब्राह्मण को वस्त्र आदि का दान करना चाहिए

डॉ सोनिका जैन
चेयरपर्सन, ज्योतिष ज्ञानपीठ
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