रिपोर्ट ब्रह्मानंद चौधरी ब्यूरो चीफ हरिद्वार
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  वेबीनार में देश भर से जुड़े प्रतिभागियों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर आयोजन सचिव डॉ दीपा अग्रवाल ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और वक्ताओं का परिचय कराया।
  देश के विख्यात पत्रकार निशीथ जोशी ने कहा कि कोरोना के इस संक्रमण काल में सोशल मीडिया महत्वपूर्ण रोल अदा कर रहा है। इस दौर में नए नए शब्द निकल कर आ रहे हैं। जो आमजन  में घुल मिल गए हैं।उन्होंने कहा कि कोरोना काल के चलते ही इंडियन कल्चर दोबारा से वापस आ रहा है।  हाथ मिलाने के इस युग में लोग हाथ जोड़कर प्रणाम करने लगे हैं।उन्होंने कहा कि कोरो ना काल से पहले जनता कर्फ्यू को हम में से कोई नहीं जानता था लेकिन अब जनता कर्फ्यू एक आम प्रचलित शब्द बन गया है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन का काल है और परिवर्तन के इस काल में सभी मानव एकजुट हो रहे हैं।कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए  देशों की सीमाएं छोटी पड़ गई हैं। पूरी दुनिया मिलकर कोरोना के संक्रमण से लड़ रही है।
विश्वास रखिए नया रास्ता खुलेगा
-कीनोट स्पीकर  गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ श्रवण कुमार शर्मा ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण काल में इंसान को सभी रास्ते बंद नजर आ रहे हैं ।लेकिन हमें विश्वास रखना होगा और इंसानियत को जल्द ही एक नया रास्ता नजर आएगा।उन्होंने कहा कि संहार में ही सृजन छुपा है। करोना हमें याद दिलाता है एक नया रास्ता अंडर प्रोसेस है। कहा कि इस समय लिटरेचर, लैंग्वेज और मीडिया आपस में जुड़ गए हैं।
पुराने स्वरूप में लौटेगा मीडिया
-सूचना विभाग के उपनिदेशक नितिन उपाध्याय ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण काल का सबसे बुरा प्रभाव प्रिंट मीडिया पर पड़ा हैइसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया दोबारा से अपने पुराने स्वरूप में लौटेगा। लेकिन तब बहुत कुछ परिवर्तन आएगा।उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया तभी जीवित रह पाएगा जब एक अच्छा कंटेंट और पब्लिक इंटरेस्ट की खबरें पाठकों को देगा। उन्होंने पोर्टल में कम गंभीर खबरें होने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि न्यूज़ पोर्टल पर सनसनी प रो सी जा रही है।इससे बचना होगा।
ग्राफिक एरा विद्यालय देहरादून की प्रोफेसर शिखा मिश्रा शुक्ला ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण काल में मानसिक तौर पर बहुत नुकसान हुआ है। सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिता रहे हैं। जिसका प्रभाव सीधे तौर पर मस्तिष्क पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सूचना का महाकाल है।जिसमें बहुत सारी सूचनाएं आ रही हैं और हमें उन में से पॉजिटिव सूचनाओं को ग्रहण करना है। उन्होंने कहा कि  लोगों के भीतर एकाकीपन बढ़ा है। जिससे वह डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। इसके लिए सभी को अपनी दिनचर्या में परिवर्तन करना होगा। दिल्ली की वरिष्ठ पत्रकार पारुल बुधकर ने कहा कि इस काल में नेगेटिव न्यूज़ बहुत ज्यादा शेयर की गई है। उस पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। इस दौर में सबसे खतरनाक बात यह है कि सूचनाएं वेरीफाइड नहीं है।न्यूज़ चैनलों ने  लोगों के भीतर डर पैदा किया है।जिसके कारण लोगों में चिंता और परेशानी बढ़ी है।
निष्कर्ष से लाभान्वित होंगे लोग
-दिल्ली से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार प्रभात ओझा ने कहा कि वेबीनार का यह आयोजन समय के अनुकूल है।इस समय इस तरह के आयोजन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और उसके निष्कर्ष से लोग लाभान्वित होंगे।
चमन लाल महाविद्यालय के प्राचार्य एवं भाषा विज्ञानी प्रोफेसर सुशील उपाध्याय ने  कोरोना काल में हिंदी ने  अंग्रेजी और तकनीकी तकनीक के कई शब्दों को ज्यों का त्यों अंगीकृत कर लिया है।  आइसोलेशन और लॉकडाउन जैसे शब्दों का हिंदी अर्थ लिखने के बजाय इन्हें मूल रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदी मीडिया ने भी इन शब्दों को मूल रूप में स्वीकार कर लिया है।
समन्वयक डॉक्टर सरोज शर्मा ने वेबीनार  का निष्कर्ष प्रस्तुत किया। समन्वयक डॉ अपर्णा शर्मा ने प्रतिभागियों का आभार जताया।
प्रबन्ध समिति का मिला आशीर्वाद
-चमन लाल महाविद्यालय  की प्रबंध समिति के अध्यक्ष रामकुमार शर्मा ने आयोजन सचिव डॉ दीपा अग्रवाल और पूरी  टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन शिक्षकों और शोधार्थियों को नया सीखने -करने की प्रेरणा देते हैं। प्रबंध समिति के सचिव अरुण हरित ने कहा कि कोरो ना वायरस के संक्रमण ने पूरी मानवता को प्रभावित किया है।कोषाध्यक्ष अतुल हरित ने कहा कि हर काल के कुछ सकारात्मक पहलू भी होते हैं। कोरोना का संक्रमण काल भी  लोगों को एकजुट कर गया और उनके अंदर के सेवा भाव को जगा कर गया है।
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