समाजवादी युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष मौसम अली ने अधिशासी अभियंता ऊपरीखंड गंगनहर रुड़की को पत्र के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि
पिरान कलियर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। जहां बड़ी संख्या में जायरीन (श्रद्धालु) अपनी मन्नते लेकर आते हैं‌। लेकिन पूरानी गंगनहर के बंद होने से सैकड़ों की संख्या में पशु पक्षियों के शव मरे पड़े हैं। जिससे नगरवासियों को बिमारी फैलने का अंदेशा सता रहा है। बंद पड़ी नहर में भयंकर मक्खी व मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से भंयकर बिमारियां फैल सकती है।

पिरान कलियर पूरानी गंगनहर में पड़ी गंदगी व कूड़े के ढेर ऐसा ही कुछ बयां कर रहे हैं। नहर में पानी नहीं चलने से गंदगी और मरे हुए पशु पक्षियों के शव पड़े हैं। जिनसे पूरानी गंगनहर के पास से गुजरने वाले राहगीरों को नहर से आने वाली दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। लेकिन कोरोना काल में भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है।
नहर में पानी नहीं चलने से जगह-जगह नहर कूड़े व गंदगी से पट गई है। साफ-सफाई करने के बजाय गंदगी नहर में फेंक दी जाती है। हालत यह है कि नहर को कूड़ादान बना दिया गया है। सिंचाई महकमा तो क्या स्थानीय लोग भी इस ओर मुंह फेरे हुए नजर आ रहे हैं। नतीजा स्थानीय वाशिंदों का जीना दूभर हो गया है।
नहर में बढ़ती गंदगी से गर्मी के सीजन में बीमारी का भय बना रहता है। लेकिन लम्बे समय से सिंचाई विभाग की ओर बंद पड़ी गंगनहर की साफ-सफाई नहीं की गई है। जिससे डबल इंजन की सरकार के अधिकारी ही स्वच्छ भारत अभियान को दरकिनार करते हुए नजर आ रहे हैं।

रिपोर्ट जावेद अंसारी ब्यरो चीफ उत्तराखंड
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