रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है जब हज़ारों बार लड़ने झगड़ने के वाबजूद भी भाई-बहन इस दिन एक दूसरे के प्रति अपने स्नेह को जाहिर करते हैं। भाई-बहन के स्नेह का प्रतिक माने जाने वाले त्यौहार रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं, और भाई भी अपनी बहन को ये वचन देता है कि वो हमेशा उसकी रक्षा करेगा और  उसके सुख-दुःख में साथ खड़ा रहेगा।
यह बात तो सभी जानते हैं कि इस दिन बहने शुभ मुहूर्त में भाई को तिलक लगाती हैं, उनकी कलाई पर राखी बांधती है और भाई बहनों को आशीर्वाद और भेंट देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर हर साल हम यही चीज़ें क्यों करते हैं, किसने इसकी शुरुआत की थी? माथे पर तिलक और कलाई पर राखी क्यों बांधते हैं।

*रक्षाबंधन शुभ मुहूर्त और समय* :

राखी बांधने का मुहूर्त
09:27:30 से 21:17:03 तक
अवधि
11 घंटे 49 मिनटरक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त
13:47:39 से 16:28:56 तक
रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त
19:10:14 से 21:17:03 तक

राखी बांधते समय बहनें ज़रूर रखें इन बातों का ध्यान

अक्सर बहनें राखी बांधते समय कुछ ज़रूरी बातों का ध्यान नहीं रखती हैं। यदि भाई की कलाई पर पूरे विधिपूर्वक राखी बाँधी जाए, तो भाई की उम्र लंबी होती है और आपके द्वारा की कामना भी पूरी होती है। तो चलिए जानते हैं, राखी बांधते समय किन ज़रूरी बातों का ध्यान रखना होता है-

राखी बांधने तक भाई और बहन दोनों को उपवास रखना चाहिए ।

सबसे पहले राखी की थाली को सजाएं।

थाली में राखी, दिया, रोली, कुमकुम, अक्षत और मिठाई आदि रखें।

इसके बाद भाई को माथे पर रोली, कुमकुम का तिलक रखें।

अब भाई पर अक्षत छीटें।

भाई के दाहिने हाथ में राखी बांधें।

इसके बाद भाई की आरती उतारें।

यदि भाई आपसे बड़ा है तो उसके पैरों को छूकर उनसे आशीर्वाद लें।

अंत में भाई को मिठाई खिलाएं।

राखी बांधने के बाद भाई इच्छा और सामर्थ्य अनुसार बहनों को भेंट दें।

*भाई के माथे पर क्यों लगाते हैं तिलक*

रक्षाबंधन के दिन भाई को राखी बाँधने के बाद बहनें उनके माथे पर कुमकुम, चंदन या फिर केसर से तिलक लगाती हैं। कुछ लोग तिलक में चावल का प्रयोग भी करते हैं। लेकिन  क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों भाई के माथे पर तिलक लगाते हैं। तिलक लगाने के पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक कारण दोनों ही होते हैं।
तिलक को प्यार, सम्मान, विजय व् पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। यह हमेशा माथे के बीचों-बीच लगाते हैं। माथे के बीच के स्थान को छठी इंद्री या अग्नि चक्र का स्थान कहा जाता है। इसी जगह से ही पूरे शरीर में शक्ति एवं ऊर्जा का संचार होता है। विज्ञान के अनुसार माथे के बीच में दवाब के साथ तिलक लगाने से व्यक्ति के याददाश्त और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, निर्णय लेने की क्षमता प्रबल होती है, बौद्धिक और तार्किक क्षमता बढ़ती है, साथ-साथ बल और बुद्धि में भी वृद्धि होती है।
कुलमिलाकर देखा जाये तो तिलक करने से होने वाले सभी लाभ एक भाई को उसकी बहन की रक्षा करने के लिए ज़रूरी होते हैं। इसीलिए बहन के द्वारा भाई के माथे पर तिलक लगाने को बेहद ख़ास माना गया है। इसका मतलब हुआ कि बहनें अपने भाई को उनकी  रक्षा करने के लिए तैयार कर रही है। इसलिए हर बहन रक्षाबंधन के दिन अपने भाई के माथे पर तिलक करती है।

*क्यों करते हैं तिलक में चावल का प्रयोग*

तिलक की बात कर ही रहे हैं तो अक्सर आपने देखा होगा माथे पर तिलक के साथ चावल के दाने भी लगाएं जाते हैं। आपकी जानकरी के लिए बता दूँ कि चावल हिन्दू धर्म में देवताओं को चढ़ाये जाने वाला सबसे पवित्र अन्न माना गया है। ऐसी मान्यता है कि तिलक के साथ यदि कच्चे चावल का इस्तेमाल किया जाये तो व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होते रहता है और बुरी शक्तियां भी उससे दूर रहती हैं।

डॉ सोनिका जैन
ज्योतिषाचार्या
चेयरपर्सन, ज्योतिष ज्ञानपीठ
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