बागपत।
दिल्ली से लापता हुए 76 बच्चों को तलाश कर परिजनों से मिलवाने वाली सीमा ढाका किरठल गांव की बहू हैं। आउट ऑफ टर्न प्रमोशन के बाद अब वह एएसआई बन गई हैं। ढाका का कहना है कि पहला कदम उठाने के बाद से सफलता मिलनी शुरू हुई, इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। सबसे बड़ी उपलब्धि खुशी की है। बच्चों को उनके परिवार से मिलाने से बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती।

शामली के बाबरी थाना क्षेत्र के भाज्जू गांव की रहने वाली सीमा साल 2006 में दिल्ली पुलिस में बतौर हेड कांस्टेबल भर्ती हुई थी। वर्ष 2009 में दिल्ली पुलिस में ही हेड कांस्टेबल और बागपत के किरठल गांव निवासी अनित ढाका से सीमा की शादी हुई थी। समयपुर बादली थाने में तैनात सीमा ढाका ने दृढ़ संकल्प के साथ बच्चों को तलाशने की शुरूआत की। सीमा कहती है कि एक-एक करके श्रृंखला जुड़ती चली गई और संख्या कब 76 पर पहुंच गई, उसे भी पता नहीं चला। पदोन्नति तो विभाग की ओर से इनाम है, लेकिन जो खुशी मिली है वह अनमोल है। लापता बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलाने के दौरान भावुकता के पल हमेशा के लिए मेरे जेहन में बस गए हैं।

ऐसा है सीमा ढाका का परिवार

बागपत। सीमा ढाका के ससुर वेदपाल सिंह किसान हैं और सास कुसुम देवी गृहिणी हैं। पति अनित दिल्ली के रोहिणी थाने में हेड कांस्टेबल है। देवर सचिन सेना में नायब सूबेदार है। बेटा आरव ढाका आठ साल का है और भतीजा सम्राट डेढ़ साल का है। परिवार किरठल और दिल्ली में रहता है।

परिवार ने हर कदम पर दिया मेरा साथ : सीमा ढाका

बागपत। एएसआई सीमा ढाका कहती हैं कि पहले माता-पिता और उसके बाद ससुराल में परिवार ने उसका भरपूर साथ दिया। उसके हर फैसले को सुना और माना गया। इसी तरह समयपुर बादली थाने में तैनात स्टाफ ने उसकी हर जगह मदद की। जरूरत पड़ते ही फोर्स उपलब्ध कराई गई।

कोरोना और लॉकडाउन था सबसे बड़ी चुनौती

बागपत। एएसआई सीमा ढाका ने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में मिशन शुरू हुआ। बच्चों की तलाश शुरू हुई तो उसे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बिहार की यात्रा करनी पड़ी। यात्रा के लिए आवागमन के साधन कम और कोरोना का खतरा भी रहा। सबसे मुश्किल पश्चिम बंगाल में एक रेड के दौरान हुई। लेकिन दिल्ली पुलिस के पूरे स्टाफ ने उसका साथ दिया।

जानिए, क्यों एएसआई बनीं सीमा ढाका

बागपत। सीमा ढाका दिल्ली पुलिस की पहली ऐसी पुलिसकर्मी बन गई हैं, जिन्हें लापता बच्चों को ढूंढने पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने पांच अगस्त को लापता बच्चों की तलाश के लिए योजना बनाई थी। शर्त रखी गई थी कि जो सिपाही या हेड कांस्टेबल एक वर्ष में 14 वर्ष से कम उम्र के 50 या उससे अधिक लापता बच्चों की तलाश करेगा, उसे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया जाएगा। सीमा ढाका ने 76 बच्चों को उनके परिवार से मिलाया। इनमें 56 बच्चों की उम्र 14 वर्ष से कम है।

सोशल मीडिया पर छा गई सीमा ढाका

बागपत। बच्चों को तलाश करने में उपलब्धि हासिल करने वाली सीमा ढाका सोशल मीडिया के हर प्लेटफार्म पर छा गई। उनकी मेहनत और कामयाबी के किस्से का हर जगह बखान किया जा रहा है।

बधाइयां देने का सिलसिला जारी

बागपत। सोशल मीडिया पर सांसद डॉ सत्यपाल सिंह, रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, बागपत विधायक योगेश धामा, बड़ौत विधायक केपी मलिक और छपरौली विधायक केपी मलिक ने भी सीमा ढाका को बेहतरीन कार्य के लिए बधाई दी।

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